Japan Defence Policy 2026: Pacifism से Deterrence तक का सफर
JAPANESE DEFENSE POLICY

दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है कि World War II के बाद से जिस देश ने हथियारों और युद्ध से हमेशा के लिए दूरी बना ली थी, वो अचानक अपनी military power क्यों बढ़ा रहा है? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं Japan की। हाल ही में, Japan Defence Policy में एक ऐतिहासिक और बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आज के इस blog post में हम आसान भाषा में समझेंगे कि कैसे Japan अपनी शांति-प्रिय (pacifist) नीति को छोड़कर अब एक आक्रामक (assertive) ‘Deterrence’ (प्रतिरोध) की रणनीति अपना रहा है और इसका India और Indo-Pacific region पर क्या असर होगा।

Japan Defence Policy में असल बदलाव क्या है?

Japan के 1947 के constitution (संविधान) के Article 9 के तहत देश में युद्ध करने और offensive सेना बनाने पर पूरी तरह से रोक थी। इसे “Self-Defence” (आत्मरक्षा) तक ही सीमित रखा गया था।

लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। हाल ही में, 21 अप्रैल को Japan ने lethal weapons (घातक हथियारों) के export पर लगा अपना पुराना ban हटा दिया है। यह एक बहुत बड़ा ‘strategic pivot’ है। इसका मतलब है कि Japan अब सिर्फ अपनी रक्षा नहीं करेगा, बल्कि अपनी defence industry को बढ़ाकर दूसरे देशों के साथ हथियारों की deals भी करेगा।

इस ऐतिहासिक बदलाव के मुख्य कारण (Main Reasons)

आखिर लगभग 7 दशकों (70 साल) के बाद Japan को अपनी strategy क्यों बदलनी पड़ी? इसके पीछे कुछ मुख्य global security reasons हैं:

  • China और North Korea का बढ़ता खतरा: China का लगातार बढ़ता दबदबा और North Korea द्वारा आये दिन दिए जाने वाले nuclear threats ने Japan को अपनी national security के बारे में गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया है।

  • America पर निर्भरता में कमी: US-Japan alliance अभी भी मज़बूत है, लेकिन America फिलहाल West Asia और अन्य global issues में व्यस्त है। इसलिए Japan समझ गया है कि उसे रक्षा के मामले में आत्मनिर्भर (self-reliant) बनना होगा।

  • Global Security Environment: Ukraine war जैसी घटनाओं ने दुनिया भर के security dynamics को तेज़ी से बदल दिया है, जिसने Japan की इस नई नीति में urgency ला दी है।

  • Japan Defence Policy का नया रूप और Military Upgrades

    2022 में पास की गई नई National Security Strategy के बाद से, Japan अपनी military में कई बड़े और आधुनिक बदलाव कर रहा है:

    • Defence Spending में भारी इज़ाफ़ा: Japan अब अपने defence budget को बढ़ाकर अगले 5 सालों में अपनी GDP के 2% तक ले जाने की तैयारी कर रहा है।

    • Counter-Strike Capabilities: अब Japan सिर्फ बचाव नहीं करेगा। दुश्मन के ठिकानों और missile launch sites पर सीधा हमला करने के लिए Japan अब US Tomahawk cruise missiles और upgraded Type 12 missiles हासिल कर रहा है।

    • Arms Export और Global Deals: Japan अब 17 देशों (जिसमें India भी शामिल है) को defence equipment export करने की मंज़ूरी दे चुका है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण Australia के साथ Mogami-class frigates (युद्धपोत) बनाने की लगभग A$10 billion की नई deal है।

    • India और Japan Defence Policy के बीच नया रिश्ता

      अब सबसे ज़रूरी सवाल यह आता है कि Japan Defence Policy के इस बड़े बदलाव का भारत (India) के लिए क्या फायदा है?

      India और Japan के बीच पहले से ही “Special Strategic and Global Partnership” है। हाल ही में New Delhi में 11th India-Japan Naval Staff Talks भी आयोजित किये गए। दोनों देश मिलकर advanced underwater surveillance systems और नई maritime technologies पर काम कर रहे हैं। क्योंकि India और Japan दोनों को ही Indian Ocean और Western Pacific में China के बढ़ते naval expansion से खतरा है, इसलिए Japan का militarily मज़बूत होना India के strategic interests के लिए भी एक बहुत अच्छी खबर है।

      [Conclusion]

      लगभग 70 सालों तक खुद को हथियारों और global arms market से दूर रखने का Japan का postwar experiment अब लगभग खत्म हो चुका है। बदलती दुनिया और Indo-Pacific security को सुरक्षित रखने के लिए, Japan Defence Policy का यह नया और assertive रूप आने वाले समय में बहुत अहम role play करेगा।

      आपको क्या लगता है, क्या Japan का यह नया कदम Asia में शांति लाएगा या इससे देशों के बीच tension और बढ़ेगी? अपने विचार नीचे comments में ज़रूर बताएँ!

 

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